भारत देश और विश्व भर में अनेक सामाजिक मुद्दे है जो अब तक खत्म हो जाने चाहिए थे पर अब तक खत्म नहीं हो पाए है। डिप्रेशन जैसी एक बड़ी बाधा पूरे विश्व को तोड़ती जा रही है खास कर युवाओं को। दहेज प्रथा, रिश्वतखोरी, आरक्षण, अंतर्जातीय एवम अंतरधर्म विवाह जैसे अनेक मुद्दाओ पर हमारे इस पुस्तक के सह लेखकों ने अपने विचार प्रकट कर उस पर कड़ा प्रहार किया है। इस पुस्तक में सामाजिक मुद्दाओं पे सह लेखकों द्वारा अपने आर्टिकल्स, कविता, निबंध जैसे आदि तरीको से अपनी आवाज उठाई है। हम आशा करते है की आप सभी इस पुस्तक को पढ़कर अपने जिम्मेदारी को समझे और देश और दुनिया के प्रति निष्ठा और ईमानदारी से अपना कर्म करे।
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