इस उपन्यास िे 60 के दशक के सिय के एक टुकडे कक प्रेि कहानी का वर्णन ककया गया है। उस सिय आज की तरह लडके-लडककयों के आपस िें मिलने-जुलने पर ग्रािीर् जीवन िें कई तरह की पाबन्न्दयााँ थीं। यदद कोई लडकी अपनें बुजुगों की रोक पर अपने िन िुताबबक काि करती थी तो उसका अन्जाि कभी-कभी बहुत भयंकर होता था। उस सिय की युवा पीढी आज की तरह अपने िन िुताबबक जीवन नहीं जी पाती थी। वस्तुएाँ सस्ती थी और पैदावार भी कि हुआ करती थी। तीज-त्यौहार बहुत धूि-धाि से िनाएाँ जाते थे। इस उपन्यास िें आन्त्िक प्रेि को दशाणया गया है। इसमलए यह उपन्यास पाठकों को पढने िें अत्यन्त रोचक लगेगा। प्रेि के प्रकार अनेक होते है और उनका पररर्ाि भी सुखद और दुखद दोनों होता है। इस उपन्यास िें ग्रािीर् जीवन का अधधक और शहरी जीवन का कि वर्णन ककया गया है। यह उपन्यास वाताणलाप शैली िें मलखा गया है और घटना प्रधान है। रोचकता बनाए रखने के मलए घटनाओं के बीच िें हास-पररहास को भी स्थान ददया गया है।
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