ऑरकुट वाली जिंदगी से निकलकर अचानक फेसबुक को अपनाने वाले लड़कों की कहानी को बयां करती है ये किताब। बचपन वाला वो प्यार जब लगभग पूरी प्रेमिका बन चुकी लड़की से कोई अपेक्षा नहीं होती, फिर अचानक से उस बेनामी रिश्ते को खत्म कर दिया जाता है, आप चाहकर भी उस पहले प्यार को नहीं भूल पाते। आप चाहते हैं उससे बातें करना, उसे अपने मन की बात बताना, बस वही मन की बातें आप लेटर्स में लिखते हैं, लेकिन उसे भेज नहीं पाते। वे लेटर्स जब एक साथ आ जाते हैं तो किताब बन जाती है और उसका नाम पड़ता है 'क्वीन'
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देश के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम कर चुके विश्व गौरव, 'क्वीन-मुकम्मल इश्क की अधूरी कहानी' से पहले 'मेरी दृष्टि मेरे विचार' किताब लिख चुके हैं। ब्लॉगिंग की दुनिया में विश्व गौरव एक जाना पहचाना नाम है। पत्रकारिता के क्षेत्र में विश्व गौरव ने कई राज्यों के विधानसभा चुनावों को बेहद नजदीक से कवर किया है।