साथ तो बचपन से था पर हमारा प्यार कहीं गुम था। ज़िन्दगी से हार न मानने की जिद और चुनौतियों से टकराने की हिम्मत इन्हें किस राह पर ले जाएगी ये तो वक़्त के पन्नों में दबा था। कॉलेज ख़त्म होने वाला था लेकिन आने वाली ज़िन्दगी की पाठशाला जंगल की उस अनजान यात्रा से होकर गुज़रने वाली थी। सैनिक बनकर वादियों में घर बनाने का सपना था लेकिन हक़ीक़त में तो कुछ और ही होना लिखा था, प्यार तो हर कोई करता है पर उसे हम इस तरह निभाएंगे ये तो काव्या और विशाल भी नही जानते थे।
तो चलिए पढ़ते हैं हम चार दोस्तों की मासूम शरारतों, अनजाने से प्यार तकरार और एक महासंग्राम से भरी हुई मेरी पहली कहानी... "वादियों के उस पार"
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पेशे से लेखक एक प्रतिष्ठित कंपनी में सॉफ्टवेर इंजीनियर हैं व वर्तमान में नोएडा में रहते हैं। हालाँकि वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर के निवासी हैं। लेखक ने अपनी स्कूली शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात कम उम्र में ही भविष्य के बुलावे पर शहर छोड़ दिया था। इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद लेखक ने भारत के कई बड़े शहरों का रुख़ लिया और समय के साथ अपनी क़िस्से कहानी सुनाने व कविता लिखने के प्रवृत्ति को पहचाना। अपने मित्रों में हमेशा ही व्यंग करते रहने और हर तरह के माहौल को ख़ुशनुमा बना देने की प्रवृत्ति के कारण सभी इनको पसंद करते हैं। इसके अलावा एक बार मौका मिलने पर लेखक ने बैंगलोर में रहते हुए चेन्नई की फ़ैशन इंडस्ट्री में भी अपना हाथ आज़माया लेकिन वहाँ की चकाचौंध भरी दुनिया से जल्द ही अपना रुख़ मोड़ लिया। क़िस्से, कहानियाँ व कविताएँ लिखना इनको हमेशा से ही पसंद था। परंतु प्रकाशित करने का विचार मन में काफ़ी देर से आया। और जब इस दिशा में अपने कदम बढ़ाये तो समय की कमी सदैव आड़े आती रही। ईश्वर की कृपा व बड़े जनों के आशीर्वाद से अपनी लिखी कहानी को प्रकाशित करने की लेखक की यह प्रथम चेष्टा है। लेखक की इस कृति को अपना समय देने के लिए आपका आभार!