ध्यान क्या है? ध्यान कृपा है! ध्यान अस्तित्व की कृपा है, वह घटता है! ध्यान कोई कर नहीं सकता, जो किया जाता है, वह मेथड है, वह क्रिया है और ध्यान मतलब हैपनिंग, जो घटेगा! ध्यान ग्रेस है, परमात्मा का ग्रेस है, वह घटता है!
ध्यान का अर्थ क्या होता है? ध्यान घटेगा, मतलब वहां पर मन नहीं होता है, अमनी दशा होती है। वहां पर मन नहीं होता, विचार नहीं होता, द्वंद नहीं होता, पक्ष-विपक्ष नहीं होता, शुभ-अशुभ नहीं होता, अच्छा-बुरा नहीं होता, पाप-पुण्य नहीं होता, कुछ भी नहीं होता! क्योंकि कुछ भी करोगे तो उसमें विचलन है। विचलन है, मतलब ध्यान नहीं। ध्यान का मतलब शांत, रिलैक्स होने के लिए सारे गुणा-भाग से बाहर होना पड़ेगा। गुणा-भाग से बाहर हो जाने का नाम ध्यान है!
- स्वामी मैत्रेयानंद