एवरेस्ट की दूसरी ओर एक ऐसी प्रेरणादायक कृति है, जो पर्वतारोहण और आईएएस अधिकारी रविंद्र कुमार द्वारा चीन के रास्ते से की गई माउंट एवरेस्ट की दूसरी सफलतम चढ़ाई के रोमांच से आपको रूबरू कराती है। इसमें राह के जानलेवा खतरों के साथ-साथ उस दृढ़ संकल्प और गहरे आत्मविश्वास की स्पष्ट तस्वीर उकेरी गई है, जो इंसान को असंभव से संभव बनाने की शक्ति प्रदान करती है। यह कृति न केवल पर्वतारोहण के साहसिक पहलुओं को उजागर करती है, बल्कि यह मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर एक गहरी साधना की कहानी भी है। इसमें तिब्बत के प्राचीन मठों का सजीव चित्रण और वहाँ के साधक लामाओं की चिरकालिक साधना की गहराई व उनके हर्षपूर्ण, शांतिपूर्ण, व सादगीपूर्ण जीवन शैली को बखूबी उजागर किया गया है। हर्ष और शांति से भरा जीवन जीना हर व्यक्ति की आकांक्षा होती है, जिसे प्राप्त करने में यह पुस्तक निश्चित ही मददगार साबित हो सकती है। रविंद्र कुमार ने वर्ष 2019 में अपनी इस चढ़ाई के दौरान न केवल शिखर तक पहुँचने का लक्ष्य रखा, बल्कि चोटी तक पीठ पर गंगाजल धारण करके शून्य से लगभग चालीस डिग्री नीचे के तापमान में वहाँ से 'जल बचाओ' की अपील करके जल संरक्षण के महत्व को वैश्विक मंच पर रखने की कोशिश की। पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कुछ शहरों में जल संकट आने के बाद लोग जल संरक्षण के महत्व को भली-भांति समझने लगे हैं और इसको लेकर आजकल दुनियाभर में जगह-जगह मुहिम भी चलाई जा रही है। एवरेस्ट की दूसरी ओर पाठकों को अपनी भीतरी शक्ति से अवगत कराने का प्रयास करती है, ताकि वे जीवन की कठिनतम चुनौतियों को भी पार कर सकें।
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Everest ki Dusri Ore
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