"कवि ने अपने काव्य ""मधुमास"" में मर्म बोध कराती अनेक प्रस्तुतियों से जीवन के सत्य और सुन्दरता का बोध कराया है। पाठक स्वयं उस भाव में डूब कर आनंदानुभूति से भर जाता है यही काव्य लेखन की विशेषता है। अल्हड़ और परिपक्व आयु की प्रखरता आल्हादित करती है।
शब्दों में भी जादू होता है यदि कहने का अंदाज अलग हो।"
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