सारा जहाँ अनेक बहुविध विचारों, परम्पराओं एवं संस्कृतियों से ओत-प्रोत है। सबके, सभी देशों के अपने अलग-अलग विचार एवं अलग-अलग संस्कृतियाँ हैं। आज सारा संसार ग्लोबलाइजेशन के कारण सिकुड़ता जा रहा है, किन्तु उसके विचार बढ़ते जा रहे हैं। जिस प्रकार वैज्ञानिक विकास से दुनिया छोटी होती जा रही है, उसी प्रकार विचारों का विकास बड़ी तेजी से बदलाव ला रहा है। हमारे अनजाने ज्ञान-विज्ञान-धर्म एवं समाज को दुनिया के दूसरे लोग जानने व समझने लगे हैं और विज्ञान के तीव्र विकास के नाते आज का युग ज्ञान-विज्ञान के विस्फोट का युग बन गया है। इण्टरनेट एवं कम्प्यूटर ने इस विस्फोट को आसान बना दिया है। दुनिया की कोई भी बात दुनिया के एक कोने से दूसरे कोने तक तुरत-फुरत क्षणों में पहुँचायी जा रही है और ऐसे समय में कोई भी विचार स्वदेशी है या विदेशी, पाश्चात्य (पश्चिमी) है या पौर्वात्य (पूर्वी) इसका कोई विशेष महत्व नहीं रह गया है।
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Samaajvaad Saamyvaad Mulath Bhaarateeya Vichaardhaaraa.: Deen-duhkhee, dalit-shoshit-peedit, majadoor-kisaan kee asalee vichaaradhaara
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